रविवार, 31 मार्च 2013

YAADEN (82) यादें(८२)

XII में बड़े दिनों की छुट्टियाँ होने पर;  31 दिसंबर 1973 को मैं भानियावाला से देहरादून होकर सहारनपुर तक बस पर पहुंचा।  RAILWAY के LOCO RUNNING -STAFF की हड़ताल चल रही थी, सुबह की अख़बार में खबर आ गई थी कि, आज हड़ताल टूट जावेगी,  सहारनपुर से शाम छः बजे चलने वाली Shuttle जाने के आसार न होने के कारण, वाया यमुनानगर, अम्बाला तक बस पर आना पड़ा, अम्बाला छावनी  RAILWAY-STATION पर आकर पता चला हड़ताल टूट गई है, वहीँ पर मुझे दो साथी मिल गए, एक बापू बाज़ार जयपुर के थे, जिनको नंगल डैम जाना था, उनका नाम मुझे याद नहीं, दूसरे कुरुक्षेत्र में ENGINEERING पढने वाले श्रीविजयनगर के कैलाश मिड्ढा थे;  हम तीन राजस्थानी अनायास ही मिल गए, मैं उन दोनों से छोटा था, 

अम्बाला से बठिंडा के लिए रात 10 बजे चंडीगढ़ एक्सप्रेस चलती थी, जो बठिंडा से PASSENGER के रूप में श्रीगंगानगर सुबह 10 बजे पहुँचती थी, (वर्तमान कालका बाड़मेर; एक्सप्रेस)  उस समय बठिंडा- सूरतगढ़-बीकानेर-जोधपुर-बाड़मेर METER-LINE थी, पूछताछ पर लिखा था- 31.12.73 को बठिंडा की तरफ कोई गाड़ी नहीं है, पहले तो हम निराश हुए, फिर मैंने कहा कि, रात 2 बजे अम्बाला फिरोजपुर पैसेंजर वाया बठिंडा जाती है, वह तो अगला दिन हो जायेगा, हम पुनः आशान्वित हो गए, नंगल की बस सुबह 4 बजे जानी थी, 

हमने होटल में खाना खाया, मैंने और कैलाश ने MUTTON खाया, तीसरे साथी ने पालक-पनीर खाया, कुल 9 रुपये 60 पैसे, मुझे याद है, हम तीनों ने FILM यादों की बारात देखी{धर्मेन्द्र, विजय अरोड़ा, अजीत, सत्येन कप्पू, जीनत अमान, नीतूसिंह, नंदा, आमिर खान (मास्टर आमिर )} इसी दौरान हमने एक-दूसरे  को HAPPY NEW YEAR भी कहा;   रात 1 बजे STATION पहुंचे तो फिर लिखा था, बठिंडा की तरफ गाड़ी नहीं है, मैंने ALL INDIA RAILWAY TIME-TABLE ख़रीदा कैलाश ने उस पर हम तीनों के नाम और तारीख लिखी; मैंने उसे लगभग 1990 तक संभल कर रखा था;  

नंगल वाले साथी को 4 बजे से पहले ही बस मिल गयी; हमें पता चला की गंगानगर की सीधी बस नहीं है, पटियाला से मिल जाएगी , करीब 4.45 बजे हमें पटियाला की बस मिली, जब तक पटियाला पहुंचे, गंगानगर की बस जा चुकी थी, बठिंडा की बस पकड़ी, जो संगरूर सुनाम होती हुई आई; बठिंडा से गंगानगर की बस तो मिल गयी, लेकिन गंगानगर पहुँचते-पहुँचते रात हो गयी; आगे साधन नहीं था, हम दोनों RAILWAY-STATION के सामने एक होटल में चारपाई बिस्तर लेकर सो गए, शायद 2-2  रूपये, या फिर कम में. 

 सुबह बस पर हम रायसिंहनगर पहुंचे , विजयनगर की बस पकड़ी , अम्बाला में मैंने कैलाश को जो PEN दिया था, वो नीरुबाला जौहर का था; मैं उहापोह में था कि, डोईवाला जाकर नीरू को लौटाना  है; आखिर मैंने जी कड़ा करके कैलाश से PEN वापस ले ही लिया, पर मन में ग्लानि थी कि, कैलाश क्या सोच रहा होगा ?  नानुवाला के अड्डे पर मैं उतर गया; कैलाश मिड्ढा विजयनगर चला गया, 

 बादमें  कैलाश मिड्ढा से मुलाकात या बात नहीं हो पाई, 2001 में, जब मैं अनूपगढ़ नायब-तहसीलदार था, तो पता चला की, वो सूरतगढ़ THERMAL में है, मैंने एक POST-CARD लिखा था, जिसका जवाब नहीं आया; सितम्बर 2012 में विजयनगर आने के बाद पूछताछ की तो पता चला, वो दिल्ली चले गए, फ़ोन नंबर जानने की कोशिश की पर पता नहीं लगा;

जीवन के सफ़र में राही,
 मिलते हैं बिछुड़ जाने को !
 और दे जाते हैं यादें,
जीवन भर तड़फाने को !


जयहिंद جیہینڈ ਜੈਹਿੰਦ
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704
http://apnykhunja.blogspot.com/ http://apnybaat.blogspot.com/;
http://apnyvaani.blogspot.com/   http://apnykatha.blogspot.com;
My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 24 मार्च 2013

YAADEN (81) यादें (८१)

XI उत्तीर्ण करने के बाद मई 1973 में मैं नानुवाला आया, उसी समय चाचा मदनलाल जी की शादी थी; बारात अल्लापुर (अलवर) जानी थी; मैं, पिताजी, फूफा कस्तूरी लाल जी,  विश्वनाथ का बड़ा भाई सुखदेव (बिल्लू), उनके पिताजी चूनीलाल, पंडित तीरथराम जी, करनैल सिंह, और धनीराम जी का दामाद सुरेन्द्रकुमार आहूजा, आँधियों के कारण रेलगाड़ी का समय अनिश्चित था;
रायसिंहनगर से बस पर गंगानगर, फिर बस पर हनुमानगढ़, आगे शाम छः बजे दिल्ली के डिब्बे में सादुलपुर और  रेवाड़ी, वहां से अलवर, स्टेशन के पास एक धर्मशाला में हम रुके, वहां से एक जोंगा लेकर हम अल्लापुर पहुंचे, ये मेरी अलवर या अल्लापुर की पहली यात्रा थी, हालाँकि बचपन से ही मैं वहाँ के किस्से सुनता आया था;
 वहाँ रात के खाने में राजमाष-चावल खाए, पता नहीं क्यों मुझे बहुत ही स्वाद लगे; वैसे स्वाद वाले राजमाष-चावल फिर मैंने कभी नहीं खाए;

होली की शुभकामनायें !
HAPPY HOLI 
ਸਰੇਯਾਂ ਨੂੰ ਹੋਲੀ ਦੀਯਾਂ ਵਾਧਾਯੀਆਂ !!
آپ سب کو ہولی کی مبارکباد 

जयहिंद جیہینڈ ਜੈਹਿੰਦ
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704
http://www.apnykhunja.blogspot.com/ http://www.apnybaat.blogspot.com/;
http://www.apnyvaani.blogspot.com/; www.apnykatha.blogspot.com;
My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 17 मार्च 2013

YAADEN (80) यादें (८०)

जब हम IX C में थे, तो हिंदी के अध्यापक सोहनलाल शर्मा हमारे CLASS TEACHER थे।  XI  C दक्षिण दिशा वाले ऊपर के कमरे में थी। जबकि हमें XI  C में पुरानी IX C की लाइन में उससे पश्चिम वाला कमरा मिला। कुछ दिन हमने BD NETHANI और सत्यपाल अरोड़ा जी से विरोध भी किया।   यानी के XI  C में हमर CLASS-ROOM भवन के उत्तर-पश्चिम में नीचे वाला, दक्षिण को खुलता हुआ था। 
सत्यपाल अरोड़ा XI हमें PHYSICS पढ़ाते थे; वे Q क्यू को क्यऊ बोलते थे; उन्होंने ऐलान किया था कि, सालभर में जिसके PHYSIC में सबसे ज्यादा नंबर आयेंगे, उसे वे एक किताब ईनाम देंगे; और वो किताब मैंने ही जीती थी; XII के शुरुआत में ही उनका किसी अन्य स्थान पर चयन हो गया था, और वे PIC डोईवाला छोड़ कर चले गये थे; बाद में शायद 1979 या  80 में मेरे पिताजी के चाचा पिशोरी लाल जी के देहांत पर मैं और चाचा मदन लाल जी , चरण सिंह जी दिल्ली गये हुए थे, तो RAJAURI GARDEN में सब्जी  खरीदते वक़्त, अचानक उनसे मुलाकात हो गयी;
सत्यपाल जी के जाने के बाद कुछ दिन BK GUPTA (भूपेन्द्र कुमार) जी ने CHEMISTRY और Physics दोनों पढाई, फिर धर्मेन्द्र कुमार जी की नयी नियुक्ति हुई, उनका बताया, हमारे पल्ले नहीं पड़ता था; हमने काफी प्रयास किया कि, गुप्ता जी ही हमें PHYSICS CHEMISTRY दोनों पढ़ाते रहें; पर हमारी बात नहीं मानी गयी; फिर श्रवण अग्रवाल, मैं, सुखदेव और एक साथी और हम चारों गुप्ता जी के पास एक महिना PHYSICS की TUTION  पढ़े;
गुप्ता जी के पढ़ाने और समझाने का तरीका इतना व्यवहारिक था की CHEMISTRY एकदम से समझ में आ जाती थी; एक और विशेष बात यह थी कि, वे केवल BSs थे; और  Intermediate की कक्षाओं को पढ़ाते थे; वे नजीबाबाद के रहने वाले थे, शरीर से मोटे थे, कुछ साल बाद मुझे पता चला कि उनका देहांत हो गया; उनका चेहरा, अंदाज़ और अल्फाज़ वैसे ही मेरी आँखों में तैरते हैं;

जयहिंद جیہینڈ ਜੈਹਿੰਦ
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704
http://www.apnykhunja.blogspot.com/ http://www.apnybaat.blogspot.com/;
http://www.apnyvaani.blogspot.com/; www.apnykatha.blogspot.com;
My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 10 मार्च 2013

YAADEN (79) यादें (७९)

भानियावाला / डोईवाला प्रवास के दौरान केशरसिंह जी JOLLY-GRANT से मेरी काफी घनिष्ट मित्रता हो गई थी। वे उम्र में मुझसे काफी बड़े हैं। जब मैं IX में दाखिल हुआ, उस समय तक वे INTERMEDIATE के बाद JBT (Junior Basic Teacher) व IGD BOMBAY (Inter Graduate Drawing ) के COURSE पूर्ण करके PIC में CHEMISTRY के LAB-ASSISTANT थे। फिर वे PIC में ही कक्षा VI से VIII के अध्यापक के रूप में नियुक्त हो गए। कुछ समय बाद वे SGN KHALSA INTERMEDIATE COLLEGE देहरादून में चले गये। बाद में उनकी नियुक्ति डाक-तार विभाग में हो गयी। फिर वे अधिकतर GPO देहरादून में ही रहे। उत्तरांचल अलग होने पर वे POST MASTER GENERAL के कार्यालय में रहे। हम दोनों का एक दुसरे के पास काफी आना-जाना रहा। वे मेरे साथ एक बार नानुवाला भी आये।

इसी तरह बड़े मामा जी की दुकान के मालिक वैद्य रामस्वरूप जी भट्ट जिनकी रिहायश दुकान के ऊपर ही थी; वे मेरे पिताजी से काफी घुलमिल गए थे। उनका बड़ा लड़का श्रीकांत हरिद्वार पढता था। छोटा शशिकांत मुझसे एक या दो कक्षा आगे था। उससे छोटे रमाकांत-लक्ष्मीकांत (जुड़वाँ) कक्षा पाँच में मेरे सहपाठी थे। जब मैं नौवी में दुबारा गया तो उन दोनों से मुलाकात नहीं हुई। उन दोनों को आम तौर पर कोई नहीं पहचान सकता था; मगर हम सहपाठी पहचान लेते थे। उनकी छोटी बहन मेरी छोटी बहन सरोज की सहेली बन गयी थी।

वैद्य जी भी दो बार नानुवाला आये। एक बार मेरे वहां रहने के दौरान ही और दूसरी बार मेरी शादी में पिताजी ने विशेष रूप से वैद्यजी और डोईवाला के मशहूर पंडित रामानंद जी को नानुवाला बुलाया। छोटे मामा जी के साथ उनके दोस्त मामा सुरेश कुमार जी (घराट वाले ) भी आये थे। दीवाली के दुसरे दिन छोटे मामा जी रुक गए थे और मैं उनके साथ वापस रवाना हुआ। हम उनके घर पानीपत गए। उन्होंने वहाँ AMAR BHAWAN CHOWKजिसे तीन अलग-अलग दिशाओं से देखने पर हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी में अलग-अलग अमर भवन लिखा नज़र आता था। वहां हमने दिलीपकुमार, प्राण, वदीदा रहमान, मुमताज़ की मशहूर फिल्म राम और श्याम देखी। उनके साथ ही मैं पानीपत से डोईवाला आया।


आई हैं बहारें; देखो दूर हुए गम !

 प्यार का ज़माना आया;
मिटे ज़ुल्म-ओ-सितम !!
राम की लीला रंग लायी;
 श्याम ने बंसी बजायी।

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 3 मार्च 2013

YAADEN (78) यादें (७८)


JOLLY-GRANT में हमने ऋषिकेश रोड से लगती हुई, 10 बीघा ज़मीन 6000 रुपये में खरीदी थी; उस समय उसमे गन्ना लगा हुआ था; अगली फसल धान बोई थी; बाद में हमने 8000 में बेच दी; यह लगभग वह स्थान है, जहाँ अब HIMALAYAN INSTITUTE OF MEDICAL SCIENCE  बना हुआ है;
 धान के SHELLER, तोरिया तेल निकलवाने EXPELLER पर या मक्की का आटा पिसवाने घराट पर अक्सर मैं जाता रहता था;एक बार सर्दियों के दिनों में सुबह मामा जी ने मुझे Jolly से ऊपर किसी गाँव में शायद धान या मक्की लेने किसी के घर भेजा, उनको भी मैं मामाजी ही कहता था; उन्होंने मुझे गरमा-गरम दाल-भात खाने को दी, मैं cycle पर गया था; हाथ इतने ठण्डे हो चुके थे कि, मुझसे खाया नहीं जा रहा था;  वापस आकर मैंने मामीजी को बताया तो उन्होंने कहा कि - उनसे कह देता कि मैंने हाथ सेकने हैं;
टिहरी बांध का कार्य आरम्भ हो चुका था; ऊपर पहाड़ से लोग अपने बैल लेकर नीचे आते थे; विस्थापन क्रिया का आरम्भ हो गया था; डोईवाला से भानियावाला के बीच सड़क के दोनों तरफ पुराली के ढेरों के साथ गढ़वाली अपने बैल लेकर आते-जाते रहते थे; मैं किशोर था, तो भी उनकी आँखों में मैंने बेघर होने के अहसास को महसूस किया था;  अभी दो-तीन साल पहले अख़बार में पढ़ा कि टिहरी-जलाशय को अब जाकर पूरा भरा गया है, कुछ लोग अभी भी घर छोड़ने को तैयार नहीं थे, टिहरी उजड़कर NEW TEHRI बस चुकी है;


जयहिंद جیہینڈ ਜੈਹਿੰਦ
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704
http://www.apnykhunja.blogspot.com/ http://www.apnybaat.blogspot.com/;
http://www.apnyvaani.blogspot.com/; www.apnykatha.blogspot.com;
My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 24 फ़रवरी 2013

YAADEN (77) यादें (७७)

HIGH-SCHOOL के बाद मैं फिर भानियावाला बड़े मामाजी के पास रहने लगा था। मेरा परम-मित्र सतीश चन्द्र वैश्य अपनी मौसी के पास, लक्ष्मण विद्यालय इण्टर कॉलेज देहरादून में दाखिल हो गया था। हम दोनों ने AJANTA STUDIO चकराता रोड, देहरादून में इकट्ठी PHOTO खिंचवाई थी जो अभी भी मेरे पास है।
  
1971 की लड़ाई और बांग्लादेश के जन्म के साथ ही प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी का देश-विदेश में कद बढ़ा। इसके साथ ही भारत सरकार ने कुछ कड़े और ऐतिहासिक फैसले क्रियान्वित किये। भूतपूर्व राजा-महाराजाओं की पेंशन (PRIVY-PURSE) बंद करना, बैंकों का राष्ट्रीयकरण, शारदा-कानून, सीमित बाराती आदि।
उसी दरम्यान राष्ट्रीय रंगमंच पर दो-तीन अप्रत्याशित सी घटनाएँ हुईं।

1- भारत के मुख्य न्यायधीश श्री अजीतनाथ राय पर गोली चली।
2- STATE BANK OF INDIA की कनाट-प्लेस शाखा, नई दिल्ली से 60,00,000/ - रुपये का दिन-दहाड़े गबन हुआ HEAD-CASHIER  ने बताया की उसे इंदिरागांधी का PHONE आया; जिसमें कहा गया था - "बेटा, मैं प्रधान-मंत्री रही हूँ। मेरा आदमी आ रहा है; बांग्लादेश शरणार्थियों के लिए साठ लाख रूपये दे देना।"
3- मुकदमा चलने से पहले ही,  HEAD-CASHIER की जेल में मौत हो गयी।
4- दिल्ली से अहमदाबाद जाने वाली रेलगाड़ी में RAILWAY-BOARD के अध्यक्ष (शायद अशोक गांगुली) की BOGIE भी लगी हुई थी, जिसे बीच के किसी स्टेशन पर काट कर अलग कर दिया।

मेरा किशोर-मन इन घटनाओं से काफी उद्वेलित हो गया था।
scan0003.jpgscan0004.jpg

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N 

रविवार, 17 फ़रवरी 2013

YAADEN (76) यादें (७६)

फ़ोटो: A view of Doiwala Railway station: http://apnybaat.blogspot.in/2013/02/yaaden-76.html
1971 की लड़ाई के वक़्त मैं दसवीं में था। चारों तरफ BLACK-OUT और लोगों में अथाह जोश। उस दरम्यान गुरूजी हसीन अहमद साहब में मैंने बला की स्फूर्ति देखी। मोटर-गाड़ियों की HEAD LIGHT काली-पट्टी पर  SILVER COLOUR में लिखा होता था -
 CRUSH-PAK
  हसीन साहब CLASS-ROOM में जितने सख्त-मिज़ाज थे, बाहर उतने ही सौम्य और नेक-दिल इंसान थे। उनका लड़का SHELLY छोटा ही था; उन्होंने बताया कि, अंग्रेजी कवि PERCY BISES SHELLY (PB SHELLY) के नाम पर रखा है। वे अंग्रेजी पढ़ाते थे; उनका समझाने का तरीका अच्छा था।  उन्होंने एक दिन कक्षा में मुझसे पूछा - अशोक FIRST DIVISION आएगी ? मैंने पूरे आत्म-विश्वास से कहा-YES SIR !
बुधवार को सफ़ेद DRESS पहनने की छूट थी, मैंने NARANG CLOTH STORE से सफ़ेद TERECOT की पेंट का कपडा 16 रुपये में लिया था; FOAM की SHIRTS का CRAZE था, मैंने 6 रुपये में हरी धारीदार कमीज़ का कपडा लिया था, PUNJAB TAILORS उस समय पेंट 3 रुपये, और SHIRT 1 रुपये में सिलते थे;  
HIGH SCHOOL 1972 की परीक्षा में हम चार विद्यार्थियों की FIRST DIVISION आई थी। किरणबाला जौहर, सुधीर कुमार शर्मा, सुभाष चन्द्र जायसवाल, और मैं। उस वक़्त माध्यमिक शिक्षा परिषद् उत्तर प्रदेश; इलाहाबाद का परीक्षा परिणाम लखनऊ से छपने वाले अंग्रेजी दैनिक NATIONAL HERALD में छपता था।
RESULT वक़्त मैं नानुवाला में था। वापस जाने पर पता चला की मेरे मित्रों ने RESULT सुनाने की ख़ुशी में छोटे मामाजी से 2/- रुपये ईनाम लिया था। 
काश सभी अध्यापक हसीन साहब जैसे हो पाते !!

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 10 फ़रवरी 2013

YAADEN (75) यादें (७५)

1971 में नई-कांग्रेस (congress-R) गाय-बछड़े को लेकर चुनाव में उतरी तो संगठन-कांग्रेस (पुरानी-कांग्रेस) अपने पुराने चरखे के साथ थी। जनसंघ का जाना पहचाना नारा था-
 देश का दीपक ; प्रदेश का दीपक।
 एक खास और राज की बात ये कि, बड़े मामाजी ने दिल्ली से आये हुए जनसंघ के कार्य-कर्तायों के साथ; मुझे भी JOLLY  के POLLING-BOOTHS पर भेजा था। 
नयी-कांग्रेस ज़बरदस्त बहुमत से जीती; इंदिरा गाँधी लगातार गद्दी-नशीं रहीं। देवराज उर्स कांग्रेस अध्यक्ष बने। INDIRA IS INDIA का नारा प्रचलन में आया। 
इसी बीच पाकिस्तान में भी आम-इंतेखाब हुए , ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को शिकस्त देकर बंग-बंधू शेख मुजीब-उर-रहमान की आवामी लीग ने फ़तह हासिल की। इस शिकस्त से नागवार मशरिकी-पाकिस्तान के हुकुमरान ; शेख मुजीब को गद्दी सौंपने से इंकार हो गए। मगरीबी-पाकिस्तान में ज़बरदस्त इंक़लाब चला। पाकिस्तानी फौजों ने उन्हें दरिंदगी से मसलने की कोशिश की। लाखों लोग अपना वतन छोड़ कर भारत में शरणार्थी के रूप में आ गए। ज़बरदस्त बैनल-अक्वामी दबाव के बावजूद पाकिस्तानी सियासत-दां  अपनी जिद पर अड़े रहे।
भारतीय जनता तथा जनसंघ, और COMMUNIST समेत विपक्षी दलों ने प्रधान-मंत्री का पूरा साथ दिया। इंदिरा-गाँधी ने सभी मुल्कों का तूफ़ानी दौरा किया।
हसदे-मामूल USA पाकिस्तान की तरफदारी में ही था; USSR हिन्द का हिमायती था।
भारत-पाकिस्तान का 03.12.1971 से  ज़बरदस्त युद्ध आरम्भ  हुआ मशिरिकी-पाकिस्तान (BANGLA-DESH) की मुक्ति-वाहिनी पहली बार मगरबी-पाकिस्तान के खिलाफ लड़ी। बड़े मामाजी और मैं रातभर विविध-भारती पर गाने और ख़बरें सुनते थे। 

 पाकिस्तान की ज़बरदस्त शिकस्त के साथ भारत के LEUTINENT  GENERAL जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष पाकिस्तानी LEUTINENT GENERAL AAK NIAZI ने अपनी 90,000 फौजों समेत 16.12.1972 को ढाका में आत्म-समर्पण किया।

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N 

रविवार, 3 फ़रवरी 2013

YAADEN (74) यादें(७४)

तस्वीरनौवीं के बाद दसवीं में, मैं डोईवाला में छोटे मामाजी के पास रहने लगा था। ऋषिकेश रोड पर BUS-STAND के सामने उनकी किरयाने की दुकान थी। पूर्व में रामकुमार हलवाई, पश्चिम में घई जनरल स्टोर (रेणु के पिताजी),    उससे पश्चिम में RK RADIO, उसके साथ बक्शी (खुशीराम) मामाजी की रेडियो दुकान। उसी  में लगभग चौक के कुछ पहले सुरेन्द्र सिंह के पिताजी की सिलाई-मशीन की दुकान और फिर अमरजीत सिंह के पिताजी की रेडियो की दुकान। और चौक के दक्षिण पूर्व और PUNJAB TAILORS, और उससे दक्षिण को लगती हुई शाम सब्जी वाला और फिर डाक्टर हरद्वारी (FC SHARMA ), और (कृष्णलाल) BALI BAKERS.
 मामाजी की दुकान के बिलकुल सामने सड़क से उत्तर में उत्तराखंड बेकर्स (मंगतराम, अशोककुमार, और जीजा उनके  देवराज बाली) । देवराज जी का छोटा भाई घनश्याम भी कभी-कभी जम्मू से आता रहता था। bus-stand से तकरीबन 200 meter पूर्व में ऋषिकेश-रोड के उत्तर दिशा में सड़क से करीब 10-12 feet गहराई में सुदेश, प्रवेश मामाजी (पानीपत वाले ) का घराट था। उसके ठीक सामने दक्षिण को गुड के crasser  थे। और लगभग 1 km पूर्व में उत्तर-दक्षिण बहती सोंग नदी।
चौक से उत्तर-पश्चिम में आम के पेड़ के पास, मोहन पुस्तक भंडार (सतपाल जौहर),  फिर RAILWAY STATION की तरफ आगे विनोद जिंदल, और प्रमोद गुप्ता के पिताजी की दुकानें, उत्तर को मुड़ने पर पहले पाशो-पानवाला, फिर पंडित जी टिक्की, गुलाब-जामुन वाला, फिर पूरनचंद आत्माराम (रामनिवास)। चौक से दक्षिण पश्चिम में स्प्रिट का ठेका, फिर आगे सत्येन्द्र सिंगल की दुकान, NARANG CLOTH HOUSE, कमलराज के पिताजी की दुकान और सबसे आखिर RAILWAY-STATIOCANTEEN. 
इसी तरह MILL ROAD पर सुनील BOOK DEPOT, प्रदीप वासन, और प्रवीण वासन के परिवार की दुकानें थीं। देहरादून रोड पर प्रमोद व प्रवीण  थपलियाल के पिताजी डॉक्टर थपलियाल। आगे उत्तर को HARSH CINEMA से पहले,   PRINCIPAL साहब CL SHAH का निवास था। उनका लड़का भी PIC में ही हमसे आगे पढता था। उसी तरफ आगे उत्तर को, सड़क के पूर्व में पंडित दिलाराम का घर व मंदिर था। 
उन्ही दिनों इस अफवाह ने तेजी पकड़ी कि, पंडित दिलाराम पर साया आकर लोगों के कष्टों का निवारण करता है। एक दिन मैं भी अपनी बड़ी मौसी जी के साथ रात को कीर्तन में गया था; किन्तु मैंने अपने मन में इसे स्वीकार नहीं किया। उसके बाद मैं कभी नहीं गया।     


जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 27 जनवरी 2013

YAADEN (73) यादें (७३)

डोईवाला BLOCK में मुख्य-मंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी आये। हम लोग कार्य-क्रम में शामिल होने गए। भारत में सबसे अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश के मुख्य-मंत्री के सामने बैठना सुखद और रोमांचकारी अनुभव था। वैसे भी किसी राजनीतिक हस्ती से मैं पहली बार रु-बरु हुआ था। पंडित जी की उस समय वाली, सौम्य छवि अभी भी मेरे मानस-पटल पर बसी है। उस समय तक उत्तर-प्रदेश में चौधरी चरण सिंह की अगवाई में BKD (भारतीय क्रांति दल ) का जन्म हो चुका  था। 
 नवभारत टाइम्स और हिंदुस्तान प्रमुख हिंदी दैनिक थे; शायद 12 पैसे की अख़बार थी। रविवार को CHICK-YOUNG और BLONDY  के CARTOON धारावहिक छपते थे। नंदन, चम्पक चंदा-मामा, सरिता पत्रिकाएं थीं। अखबारों में फ़िल्मी विज्ञापन, विशेषतः शुक्रवार को भरमार रहती थी। शुक्रवार को ही फ़िल्मी साप्ताहिक अख़बार SCREEN  सबसे मंहगा 40 पैसे का आता था। हास्य-व्यंग की पत्रिका 'दीवाना' का जन्म भी हो चुका था।
 उस साल 1970 की HIT FILM राजेश खन्ना, शर्मीला टैगोर, मनमोहन कृष्ण, सुजीत कुमार की "आराधना" थी। इसके सभी गाने RADIO CEYLON, विविध-भारती और ALL INDIA RADIO की उर्दू-सर्विस पर गली मोहल्ले में सुने जाते थे। इसी से राजेश खन्ना को SUPER STAR के तौर पर पहचान मिली।
 दशहरे की छुट्टियो में जब मैंने घर आना था, तो सत्येन्द्र के पिताजी के निर्देशन में रामलीला चल रही थी ; उसमें मैंने मेघनाथ का PART किया था; लक्ष्मण मूर्छा के बाद रात को, डोईवाला से मैंने अम्बाला की रेलगाड़ी पकड़ी थी। दीवाली से पहले मामाजी के साथ दुकान की  साफ-सफाई शुरू की; तो मुझे लगा, दो-तीन दिन में काम निपट जायेगा; पर हम दोनों मामा-भांजा मजदूरों के साथ लगे रहे; रात 2-3 बजे तक रंग रोगन करके हमने दुबारा सामान जचा दिया था; उस दिन मैंने वक़्त, काम और आवश्यकता को महसूस किया;
 कक्षा IX  में किरणबाला जोहर, सुभाषचन्द्र जायसवाल , सुधीर कुमार शर्मा, सत्येन्द्र सिंगल, और मेरी टक्कर थी। मैंने कक्षा में प्रथम स्थान से उत्तीर्ण किया। 

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com  
My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 20 जनवरी 2013

YAADEN (72) यादें (७२)

बड़े मामा जी तो उसी पुराने आज़ाद मामा वाले मकान में रहते थे; और दुकान वैद्य रामस्वरूप जी भट्ट वाली थी, जिसके साथ पूर्व दिशा में रतनसिंह हलवाई, पश्चिम में राजू पानवाला, और सामने उत्तर में सड़क पार मदन बंगाली की दुकान थी। छोटे मामा जी सामने भगवान् सिंह जी के छोटे भाई ओमप्रकाश सैनी की दुकान से पूर्व दिशा में, मामचंद जी गुप्ता की दुकान में BAKERY करते थे। उनकी रिहायश चन्द्रप्रकाश जी गोयल के मकान में थी। 
जन्माष्टमी 1970 वाले दिन बड़े मामा जी के बड़े लड़के राजीव (BINTU)का मुंडन था; उसके कुछ दिन बाद, बड़े मामा जी नहर के पास मामचंद जी के घर से उत्तर दिशा में, अपने मकान में चले गए। 
मामचंद जी और चन्द्रप्रकाश जी का भांजा सतीशचन्द्र वैश्य, भी मेरा सहपाठी था। वह लखनऊ का रहने वाला था; और मेरी तरह ही अपने मामा मामचंद जी के पास रहता था।  बड़ा हंसमुख और विनोदी था। 
उनसे अपना नाम तिस्सा-भाई और मेरा सुक्खा-भाई रखा था। PIC (Public Inter College ) को वह Pen Ink Chor कहता था। 1973 के बाद हमारी मुलाकात नहीं हुई। वाराणसी में होटल मेनेजर था। शायद 1990 में आखिरी पत्र-व्यवहार हुआ। 2009 के बाद मैंने उसे कई बार ORKUT और FACEBOOK पर भी तलाश करने का प्रयास किया है। 
उसने मुकेश जी के प्रसिद्ध गीत - 
सावन का महिना  ..  ..    की parody बनायीं थी- 
छुट्टी का महिना,
 mummy जी करें शोर;
 सबको लागे ऐसे ,
 जैसे घर में घुस गए चोर।।  


जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com  
My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 13 जनवरी 2013

YAADEN (71) यादें (७१)

नौवीं में शेरसिंह और  बाला दो ही भानियावाला से मेरे पांचवीं के सहपाठी थे। बाकि सुरेश कुमार करनवाल, विक्रमसिंह, प्रदीप वासन, प्रवीण वासन, प्रमोद थपलियाल, प्रवीण थपलियाल, सुधीर शर्मा, कमलराज अरोड़ा, प्रमोद गुप्ता, विनोद जिंदल, सत्येन्द्र सिंगल, सुभाष जयसवाल रमेश अग्रवाल, सतीशचन्द्र वैश्य, बलबीरसिंह, सुरेन्द्रसिंह, अमरजीत सिंह, मुमताज़ अली इस्हाक़ खान, किरणबाला जोहर, नीरू बाला जोहर, नीटारानी घई, रेनुबाला घई, के नाम और शक्लें मुझे याद हैं।
प्रमोद गुप्ता की केन्द्रीय भूमिका को लेकर हमने हसीन अहमद जी के निर्देशन में एक नाटक खेला था "यानि कि"  रतन सिंह जी सैनी के नेतृत्व में हम  YAMUNA HYDAL POWER STATION देखने ढकरानी और डाक-पत्थर गए थे, साथ  गोयल मैडम भी थीं ! देहरादून तक 41 UP MUSSOORIE ESPRESS में, और आगे बस करके, उसी साल  SCOUTGUIDE की टोली  लच्छीवाला के जंगल में CAMP-FIRE के लिए गयी। 
दिशायों के देवतायों ने बारी-बारी दौड़ कर आते हुए, अपना-अपना परिचय दिया ; और अपनी दिशा की अग्नि प्रज्वलित की। उसमें मैं उत्तर दिशा का देवता बना था। शायद हम रात को भी जंगल में ही तम्बुओं में रुके थे। कार्यक्रम में में देहरादून से DM साहिब भी पधारे थे। यद्यपि उस समय तक मैं प्रशासनिक व्यवस्थाओं के अनुक्रम से परिचित नहीं था; तथापि District Magistrate पदनाम से ही मुझे उनकी गरिमा और शक्तियों का आभास हो गया था।


जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 6 जनवरी 2013

YAADEN (70) यादें (७०)

 पब्लिक इंटरमीडिएट कॉलेज, में खाकी पेंट और नीली कमीज़ की DRESS थी। उस साल चाचा रोशनलाल शर्मा, DBS INTERMEDIATE COLLEGE, देहरादून में XI में थे। मेरे भानियावाला पहुँचाने के कुछ दिन बाद वे नानुवाला से देहरादून आये, तो घर से माँ-पिताजी ने मेरे लिए कुछ सामान भेजा; वे और उनका फुफेरा भाई सुभाष चन्द्र भानियावाला आये थे।
अगस्त 1970 के प्रथम सप्ताह में श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी से पहले सनातन धर्म मंदिर, पलटन बाज़ार देहरादून में एक गोष्ठी हुई थी; उसमे PIC  डोईवाला  की तरफ से मुझे और एक अन्य विद्यार्थी को भेजा गया था। उसमे मुझे तुलसीदास जी की रचना 'कवितावली' ईनाम में मिली थी।
मैं देहरादून रुककर 26 सेवक आश्रम रोड, (करनपुर) रोशन चाचा जी से मिलने चला गया था। वहाँ सुभाष जी, उनकी बहन वीरी, उनकी माता सुभद्रा और उनके पिता योगराज जी ने मुझे रोक लिया। शायद 2-3 दिन मैं उनके घर रुका था। उनकी बड़ी बहन मैना की शादी उससे काफी पहले दिल्ली मूर्ति देवी के पुत्र ओमप्रकाश जी (T 223A सदर थाना, ईदगाह रोड ) से हो चुकी थी। उनके रेवत नामक लड़का था।
मैं, रोशन चाचा जी, और सुभाष जी के साथ साइकिल पर खूब घूमा NATRAJ में हमने धर्मेन्द्र हेमा मालिनी प्राण महमूद की FILM देखी। उस वक़्त तक  ये मेरी छटी फिल्म थी।
 24जून, 2012 को रोशनलाल जी का दिल्ली में देहांत हो गया। 

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 30 दिसंबर 2012

YAADEN (69) यादें (६९)

वर्ष 1970 में PUBLIC INTERMEDIATE COLLEGE के प्रधानाचार्य चन्द्र लाल शाह; उपाचार्य दर्शन लाल वर्मा थे। हमें सोहनलाल शर्मा , हिंदी, हसीन अहमद अंग्रेजी, BD NETHANI PHYSICS व गणित, सृष्टि नाथ मल्होत्रा CHEMISTRY, और रिज्वाइन हक सिद्धिकी BIOLOGY पढ़ाते थे। सिद्धिकी साहब बाद में देहरादून किसी PG COLLEGE में चले गए; तो SN MALHOTRA, BIOLOGY पढ़ाने लगे; सत्य प्रकाश अरोड़ा नए आये, वे PHYSICS पढाने लगे। HIGH-SCHOOL की अन्य कक्षाओं,  तथा INTERMEDIATE कक्षाओं को पढ़ाने वाले अन्य अन्य गुरुजन वेदप्रकाश जी, मदन मोहन जी, आनंद प्रकाश जी, सुरेन्द्र कुमार शर्मा, सुरेन्द्र कुमार गैरोला, भगवान सिंह सैनी,  इन्दर सिंह खत्री, और PTI  रतन सिंह सैनी थे। कक्षा 6 से 8 वाले कुछ गुरुजन के नाम मुझे याद नहीं है।
 मेरी कक्षा IX C उत्तरी दिशा नीचे की पंक्ति में मध्य में दक्षिण को खुलता हुआ काफी बड़ा कमरा था।
 अगस्त से अक्तूबर तक   चौक बाज़ार से लेकर एक-डेढ़ किलोमीटर उत्तर से दक्षिण, पूरी MILL-ROAD गन्ने से भरी बैलगाड़ी, बुग्गी , और TRACTOR-TROLLEY; और बरसात का कीचड; पैदल तो किसी तरह निकल जाते ; या फिर RESHAM-FARM के अन्दर से निकल जाते; पर CYCLE पर  काफी मुश्किल से जा पाते थे। 

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 23 दिसंबर 2012

YAADEN (68) यादें (६८)

जुलाई 1970 में, मैं  कक्षा IX में दाखिला लेने डोईवाला गया; वहां भगवानसिंह जी सैनी मिले शक्ल से मैं उनको पहचानता था, वे भी शायद मुझे पहचान गए थे। उन्होंने दाखिले में मेरी मदद की। मेरे विषय भी उन्होंने ही भरे; मुझे राजस्थान की जानकारी थी, यहाँ अनिवार्य हिंदी, अनिवार्य अंग्रेजी, अनिवार्य गणित, एक तृतीय भाषा और किसी GROUP के तीन ऐच्छिक विषय जैसे की PHYSICS CHEMISTRY MATHS कुल 7 पढने पड़ते थे; किन्तु उत्तर प्रदेश में केवल 5 ही थे। हिंदी अंग्रेजी व् गणित अनिवार्य ही थे और उनका पाठ्यक्रम राजस्थान के एच्छिक विषयों जैसा था। ये तीनो विषय एच्छिक के रूप में नहीं थे। इसी तरह तृतीय भाषा अलग नहीं थी, बल्कि हिंदी का तृतीय प्रश्न-पत्र शुद्ध संस्कृत ही था। गुरूजी ने मुझसे विषय पूछे, तो मैं राजस्थान के हिसाब से बोला- NON-MEDICAL तो उन्होंने PHYSICS, CHEMISTRY, BIOLOGY भर दिया; क्योंकि गणित तो सबके लिए एक ही था। विद्यालय का पूरा नाम था- गन्ना-कृषक पब्लिक इंटरमीडिएट कॉलेज; डोईवाला। ये सोंग नदी के पश्चिमी किनारे पर SUGAR MILL से पूर्व दिशा में है। SUGARMILL के ठीक पश्चिम में देहरादून से हरिद्वार को जाने वाली उत्तर-दक्षिण RAIL-LINE है। भानियावाला लौट कर मैंने बड़े मामाजी को बताया की भगवानसिंह जी ने मेरा दाखिला कराया है; और मेरे पास FEES कम थी; जो उन्होंने खुद जमा करवा दी। तो मामाजी ने मुझे समझाया गुरूजी कहा करो। 
जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;

 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;


 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 16 दिसंबर 2012

YAADEN (67) यादें (६७)

File:Varahagiri Venkata Giri.jpg1969 में हुकुमरानحکمران  congress party  के एलानिया उम्मीदवार علانیہ امیدوار N Sanjeeva Reddy को शिकस्त  देकर इंदिरा गाँधी की ज़ाती पसंदीदा ذاتی  پسندیدہ Varah Venkat Giri मुल्क के सदरصدر-ے-ہند  मुन्तखिबمنتخب  हुए। नतीजतन نتیزتن CONGRESS की दो बैलों की जोड़ी से अलाहिदा  होकर गाय-बछड़े वाली नयी कांग्रेस (INDIRA-CONGRESS ) का जन्म हुआ। इसके कुछ बाद, राजस्थान में मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिया के वक़्त किसानों का आन्दोलन हुआ; जेल भरो कार्यक्रम में श्रीगंगानगर जिले के किसानों को भरतपुर की जेलों में भेजा गया था। उस दरम्यानدرمیان  आन्दोलनकारी FILM हमराज़ में महेंद्र कपूर का गया गीत :-_ 
न मुंह छुपा के जियो; और न सर झुका के जियो। نہ منہ چھپا کے جیو، اور نہ سر جھکا کے جیو
ग़मों का दौर भी आये तो, मुस्करा के जियो।। ؛ گموں کا دور بھی اے تو، مسکرا کے جیو  
खूब बजाते थे। 
फरवरी 1970 में मैं जम्मू की यात्रा से लौटा; और अप्रैल/ मई में आठवीं के इम्तिहान امتحاں होने थे। प्रेम मंडा, कृष्ण मंडा, नरेंद्र बिश्नोई, साहबराम और मेरे बीच होड़ थी। मेरे छोटे मामा सुभाष चन्द्र जी (16.04.2011को विकासनगर में देहांत) की शादी भी अप्रैल में होनी थी। मेरे गुरुजन का विचार था की, मैं शादी में न जाऊं। माँ-पिताजी और मेरी इच्छा जाने की थी। बारात डोईवाला से ऋषिकेश गई थी। ये मेरी पहली ऋषिकेश यात्रा थी; पहाड़ो से उतरती हुई गंगाजी में नहाने का रोमाँच अलग तरह का ही था। 
शादी में जाने की वजह से आठवीं की विदाई PARTY और GROUP-फोटो से मैं महरूम محروم हो गया था। आठवीं जमात  ضمات मैंने प्रथम स्थान 1204/1600 से उत्तीर्ण की। इस तरह 25NP में 3 साल का सुहाना सफ़र पूरा करके, मैं वापस देहरादून को मुड़ गया।  

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 9 दिसंबर 2012

YAADEN (66) यादें (६६)

 फरवरी 1970 में मैं अपने पिताजी की चाची (श्रीमती रामप्यारी देहांत जनवरी 2012 रायसिंहनगर ) के साथ पहली बार जम्मू गया। रिश्तेदारी में पिताजी के मामा सुन्दरदास जी की बेटी (पुष्पा बुआ) की शादी थी। रायसिंहनगर से रात 8 बजे METER-LINE से वाया श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ बठिंडा सुबह 3.30 बजे। फिर अमृतसर की बस, वहां से पठानकोट तक फिर जम्मू तक की बस। बक्षीनगर रोलकी रहने वाले सबके नाम और रिश्ते  और डाक के पते मुझे मालूम थे।  घर में अक्सर चर्चाएँ होती रहती थीं; और सारे खतो-ख़िताब पर हिंदी के पते मुझसे ही लिखवाए जाते थे। 
उस वक़्त दादा दुर्गादास जी भी वहीँ रहते थे। दादा सुन्दर दास जी जी के पुत्र (ताया साईंदास जी); समधी जयराम दास (जराम शाह) कैलाश ताई जी, उनका पौत्र चन्ना, उनकी बहन मूर्ति दादी के बेटे (चाचा मनीराम, मदन, बाबूलाल), उनके भाई पूरणचंद (पुन्नू शाह) अपने लड़कों चूनी, मणि, रोशन(गुल्ला) के साथ डिगयाना में रहते थे; राष्ट्रीय राजमार्ग 1A पर उनकी ज़मीन थी। सभी रिश्तेदारों ने मेरी खूब आव-भगत की थी। 
 KC CINEMA में फिल्म सच्चाई (शम्मीकपूर, साधना, संजीवकुमार, प्राण) देखी। 
पंडित ताराचंदजी   की बड़ी बेटी (आज्ञा बुआजी) भी बक्षीनगर ही रहती थीं। उनके लड़कों श्याम और मंगत से मेरी अच्छी घुट गई थी। मेरी नानी कौशल्या देवी के छोटे भाई बंसीलाल जी भी, अपने बड़े भाई भगतराम जी की मौत के बाद  काँगड़ा से बक्षीनगर आ चुके थे।  
उसी दरम्यान चाचा ओम प्रकाश जी के बड़े साले सुरेन्द्र कुमार की दूसरी शादी विश्वानाथ की बड़ी बहिन विमला से तय होने पर; चाचा जी और चाची आशारानी भी नानुवाला से शादी की तैयारी करने जम्मू आ गए थे। सुरेन्द्र कुमार जी की पत्नी गुजर गयी थी, और तीन लड़के थे, वे मेरे साथ घुल-मिल गए थे।  उनके छोटे भाई कृष्णलाल और उनसे छोटा प्रेम @ जीती था; जो रायसिंह नगर चाचा रोशन लाल व् सुरेश लाल के साथ पढ़ा था।   मैं भी चाचा-चाची के साथ उनके घर( खिलोने वाली गली; नईयां दी ढक्की ਨਾਈਯਾਂ ਵਾਲੀ ਢੱਕੀ ) और शादी की खरीददारी में जाता था।
 उन दिनों मफतलाल का कपडा मशहूर था। जम्मू में राजमाष चावल 60 पैसे की प्लेट थी।         जम्मू से वापसी मैं चाचा जी के साथ ही आया ; पठानकोट तक बस और आगे रेल में। मार्च में होली के आस-पास विमला की शादी हो गई, मैं भी बाराती था। मेरी बुआ सत्या भी बारात के साथ जम्मू चली गयी थी।  

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 2 दिसंबर 2012

YAADEN (65) यादें (६५)

 मेरे पिताजी को साधू-संतों और राहगीरों से लगाव था। रायसिंह नगर के रास्ते में कोई पानी की व्यवस्था नहीं थी; साथ में ही लेकर चलना पड़ता था। सुनारों वाली ढाणी 26NP और 11TK दोनों डिग्गियां मेरे होश में ही बनी थीं। विजय नगर वाली सड़क तो 1970 में बनी। पैदल या ऊँठ से लगभग 2 घन्टे का रास्ता था। पिताजी डब्बा और डोरी डिग्गियों पर बांधते ही रहते थे; क्योंकि हफ्ते दस दिन में डिब्बा-डोरी गायब हो जाते थे। शायद पिताजी के मन पर दादाजी के प्यासा हालत में मरने का गहरा सदमा था। 
 एक दिन पिताजी बाहर गए थे; और माँ शायद पानी लेने डिग्गी या नहर पर गई थी। मैं घर के बड़े कमरे में झाड़ू निकलने लगा। दीवारों के दक्षिण-पश्चिम कोने में गेहूं की आठ बोरियां एक के ऊपर एक थीं। उनके नीचे से झाड़ू लगते ही , आठों बोरियां मेरे ऊपर गिर गई। गनीमत ये कि,  कोठरी नुमा गुफा बन गई; और उसमे  उकडूं होकर; मैं अन्दर से आवाजें लगाने लगा। माँ आ गई, उन्हें मेरी आवाज़ तो सुन रही थी, पर पता नहीं चल रहा था की, किधर से आ रही है। गिरी हुई बोरियां देखकर माज़रा समझ आया; तो हिम्मत करके उन्होंने एक बोरी का कोना खींचा; मैं झट से निकल आया। 
शाम को वाकया सुन कर पिताजी काफी सहम गए थे।
 गाँव में आने वाले साधू-महात्माओं या राहगीरों की पिताजी कद्र करते थे। मेरे 25NP पढने के दौरान गाँव में एक भगवाधारी भगत जी अक्सर आते थे; वे बलराम गोदारा के घर ठहरते थे; गर्मियों में हमारे घर के खुले आँगन में और सर्दियों में हमारे 30'X12' के कमरे में 2-3 घंटे एकतारा पर भजन कीर्तन होता। उनका गया राजस्थानी भजन करमा जाटनी (अपने पिता की अनुपस्थिति में भोली-भाली करमां द्वारा श्री कृष्ण जी को भोग के लिए मनुहार करना) हम सबको बहुत पसंद था-
थाल भर ल्याई खीचड़ो; ऊपर  घी  की  बाटकी  !
जीमों म्हारा श्याम धणीजी, म्हे हाँ बेटी जाट की !! 

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 25 नवंबर 2012

YAADEN (64) यादें (६४)

1968 के आस-पास दोनों मामाजी में अलगाव हो गया; ये केवल भौतिक रूप में ही नहीं, बल्कि दोनों मानसिक तौर पर भी एक-दूसरे से अलग हो गए थे। मेरी माता ने इसके लिए मेरे बड़े मौसा मदनलाल जी साहनी को जुम्मेवार माना था। पिताजी जब भी उर्दू में ख़त लिखते, या हिंदी में मुझसे लिखवाते; उसमें बड़े मामाजी (देहावसान सितम्बर 1994) को तो लिखा जाता था, कि तुम बड़े हो छोटे से अगर कोई गलती हो भी गई हो; तो उससे ज्यादा नाराज़ नहीं होना चाहिए। इसी तरह छोटे मामाजी (देहावसान अप्रैल 2011) को लिखते, कि तुम छोटे हो, बड़े की इज्जत करनी चाहिए। और भी इसी तरह की ठंडी मीठी बातें हुआ करती थीं। अपनी समझ के हिसाब से मैं छोटे मामाजी वाले खतों पर बड़े मामाजी का और बड़े मामाजी वाले ख़त पर छोटे मामाजी का पता लिख देता था; पता नहीं मेरी ये तरकीब उनका मनमुटाव कम करने में मददगार हुई या कि नहीं ! 

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 

Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 
http://www.apnykhunja.blogspot.com/  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/;       www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 18 नवंबर 2012

YAADEN (63) यादें (६३)

25NP के SCHOOL दिनों में नहर में नहाना, आँधियों में बेर और मोर पँख इकट्ठे करना, नहर में किसी का CYCLE और बस्ते समेत गिर जाना; या फिर CYCLE PUNCTURE होने पर भरी दोपहरी में घसीटते हुए, पसीने से तर-बतर, गिरते-पड़ते, भूखे-प्यासे देर से घर पहुंचना; ये सब मामूल वाक़यात होते थे। 
सर्दियों में माचिस साथ रखते थे; जिससे ज़रुरत होने पर आग ताप लेते थे। इस माचिस की वजह से कभी-कभी बीड़ी के सूटे भी होने लगे थे। गुरुजन को भनक लगने पर विद्यालय के अलग कमरे में सबकी पेशी हुई; और ये दुर्व्यसन आगाज़ से पहले ही अंजाम तक पहुँच गया। गुरुजन के प्रति अगाध आदर की वजह से उनसे बड़ा डर लगता था कि ; हमारे आचरण के विषय में गुरूजी क्या सोचेंगे ! 
आजकल पढ़-सुनकर और देख कर अजीब सा लगता है; गुरु-शिष्य का स्नेह, आदर, विश्वास और उत्तरदायित्व कहाँ खो गया है ? भरत व्यास और कवि प्रदीप जी की पंक्तियाँ कचोटने लगती हैं -
 आज के इस इंसान को क्या हो गया ?
इसका पुराना प्यार कहाँ पर खो गया ??

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 

Ashok 9414094991, Tehsildar ; Sri Vijay Nagar 335704 http://www.apnykhunja.blogspot.com/; 
  http://www.apnybaat.blogspot.com/;
 http://www.apnyvaani.blogspot.com/; www.apnykatha.blogspot.com;
 My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 11 नवंबर 2012

YAADEN (62) यादें (६२)

सातवीं जमात के शुरुआत में ही, JULY या AUGUST 1968 में हम लोग ज्वालाजी के दर्शन करने गए। अपने माँ-बाप के साथ ये मेरी पहली तीर्थ यात्रा थी। वही रायसिंहनगर से छोटी LINE पर रात 8 बजे चल कर गंगानगर हनुमानगढ़ होते हुए सुबह 3.30 बजे बठिंडा। फिर बड़ी लाइन पर धुरी, लुधियाना, जालंधर। आगे बस पर होशियार पुर, ऊना और फिर ज्वालाजी। कुल 4 रेलगाड़ियाँ और 3 बसें। आज की तुलना में अजीब सा लगता है।
 ज्वालाजी में मैंने गरम पानी वाली गुरु गोरखनाथ जी की डिबिया का सुन रखा था। वह देखने को मैं बड़ा लालायित था। ज्वालाजी दर्शन के बाद हम कांगड़ा गए, मुझे अच्छी तरह से याद है, हम कांगड़ा पुरोहितों के पास रुके थे, खेत में ढाणीनुमा कच्चा कमरा हमें दिया था, खाने बनाने का सामान हमारे पास था।शायद रक्षा-बंधन भी उसी दरम्यान थी। 
वहां से हम पठानकोट होते हुए अमृतसर गए, वहां भी रात रूककर सरोवर में स्नान करके स्वर्ण-मंदिर मत्था टेका था। उस दर्शन की याद आज भी मेरे मन में बसी है। 1984 की घटनाओं के बाद पता नहीं क्यों मेरा मन वहां जाने का नहीं करता; हालाँकि कई मौके बने पर मेरा मन वितृष्णा से भर जाता है।
 26 जनवरी 2010 अपनी बड़ी बेटी गीतेश के जोर करने पर हम तलवंडी साबो गुरुद्वारा साहिब में गए, अच्छी तरह रात रुके, सुबह यूँ ही टहलते हुए प्रदर्शनी की तरफ चला गया, वहाँ जरनैल सिंह भिंडराँवाले को महिमा मंडित करने वाले चित्र और साहित्य देखकर मन वितृष्णा से भर गया। 
सब कुछ हमारे राजनेताओं का कराया धराया है। कब तक भोली जनता को ठगा जाता रहेगा ? 
गणेशजी, रिद्धि-सिद्धि, माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, हम सबको सदबुद्धि और ज्ञान प्रदान करें

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  
Ashok, Tehsildar  Srivijaynagar  9414094991

My Location at Globe 73.5178 E; 29.2406 N

रविवार, 4 नवंबर 2012

YAADEN (61) यादें (६१)

छटी कक्षा के दौरान ही अक्तूबर 1967 में हमारे HEADMASTER दुलाराम जी के ससुराल मन्नीवाली मैं मामी जी के साथ दीवाली की छुट्टियाँ बिताने गया। साथ उनके बच्चे संतोष और राकेश भी थे। रायसिंह नगर से दोपहर एक बजे की रेलगाड़ी से सदुलशहर तक SECOND CLASS के डिब्बे में। (उस ज़माने रेल में I, II, III CLASS होती थी।) वहाँ उनके आढ़तियों की दुकान पर गए; तो उन्होंने मन्निवाली तक JEEP किराये पर पर लेकर दी लगभग दिन छिपने पर हम मन्नीवाली पहुंचे।
  मामीजी के पिताजी का नाम मनीराम यादव था। उनके बड़े भाई का नाम रामस्वरूप और छोटा लालचन्द था। उनकी एक भतीजी का नाम स्नेह था। मैं उन्हें यथा-योग्य नाना-नानीमामा-मामी ही कहता था। लालचंद जी अध्यापक थे। 1982-84 में जब मैं लालगढ़ जाटान था तो वे MIDDLE SCHOOL पन्नीवाली में HEADMASTER थे। उनके  साथ काफी बाद तक मेरे अच्छे सम्बन्ध रहे। रावला में संतोष और राकेश की शादी में उनके परिवार के साथ मुलाकातें हुईं थी। बाद में एक दो पारिवारिक पंचायतो के सिलसिले में गंगानगर व् विजयनगर 35GB, मैं साथ गया था। 
मन्नीवाली मैंने वहां छुट्टियों का खूब लुत्फ़ उठाया। खेतों में उनके साथ कपास चुगते हुए मैं अपनी बेसुरी आवाज़ में जोर-ज़ोंर से गाता था- 
अ ऐमेरे वतन के लोगो; 
ज़रा आँख में भर लो पानी; 
जो शहीद हुए है, उनकी
 ज़रा याद करो क़ुरबानी !

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  
Ashok, Tehsildar  Srivijaynagar  9414094991