कश्मीर के बारे में मैंने अपने बचपन के दिनों में अपने घर में रात को लालटेन की रौशनी में अपने माता पिता, रिश्तेदारों और दुसरे बुजुर्गों को अक्सर चर्चा करते सुना है. मुज़फराबाद के आस पास सराय, चट्ठा, मीरपुर, हटिया, चकोठी, उडी, बागां, पलन्दरी आदि स्थानों में हमारे लोग रहते थे. १९४७ की आज़ादी के समय महाराजा हरिसिंह ने स्वतंत्र राज्य के रूप में रहने का फैसला किया. जवाहर लाल नेहरु महाराजा से बात करने गया, तो महाराजा ने नेहरु को अपने राज्य में घुसने नहीं दिया. नेहरु जी को कठुआ से वापस दिल्ली आना पड़ा. अगस्त १९४८ के आस पास पाकिस्तान ने अफगान कबाइलियों से कश्मीर में घुसपेंठ करवानी शुरू की. शेख मोहम्मद अब्दुला उस समय कश्मीर के प्रधान मंत्री थे. महाराजा ने भारत सरकार से मदद मांगी, तथा कश्मीर का भारत में विलय का प्रस्ताव दिया. गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने विलय का मसौदा तैयार करवाया. इसी बीच कबैलियो के हमले तेज हो गए और महाराजा ने राज्य का सञ्चालन शेख अब्दुल्ला व् उनके बहनोई गुलाम मोहम्मद को सौंप दिया, और खुद बम्बई चला गया. अक्तूबर १९४८ में कश्मीर लावारिस स्थिति में आ गया था. जवाहरलाल कश्मीर की मदद नहीं करना चाहते थे. शेख अब्दुल्ला और गुलाम मोहम्मद कबाइलियों को शाह और मात के तरीके से उलझाये रहे. कबाइलियों ने क्वाला और किशन गंगा के पुल काट दिए थे. सरदार पटेल ने अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए महाराजा पटियाला की सेनाओं को हवाई छतरियों से मुज़फराबाद के इलाके में उतारा. पटियाला की सेनाओं के आ जाने से गुरिल्ला छापे बंद होकर सीधी लड़ाई शुरू हो गई थी, उस समय कश्मीरियों ने पटियाला के सैनिको का भरपूर स्वागत और सहयोग किया. यहाँ तक कि काजू अखरोट वाली रोटियां घारों से बना कर पहुंचाई जाती थीं. कबाइली पीछे हटने लगे तो पाकिस्तान ने मोर्चा खोल दिया भारतीय सेना ने सारे हालात को अपने काबू में कर लिया था कबाइली और पाकिस्तानी सेना पीछे हट रही थी.
उस समय नेहरु ने सरदार पटेल के साथ अपने मतभेदों और महाराजा हरीसिंह से बदला चुकाने के लिए ३ बड़ी गलतियाँ कीं-१- युद्ध विराम
२- यथा स्थिति अर्थात LINE OF CONTROL
३- संयुक्त राष्ट्र की निगरानी
जवाहरलाल नेहरु की जिद को आज भी राष्ट्र भुगत रहा है. सबसे ज्यादा पीड़ित हैं १९४८ में बेघर हुए हिन्दू कश्मीरियों के ५०० परिवार
और हमने करेले को नीम पर चढ़ा कर संविधान में अनुच्छेद ३७० रख दी भारत का कानून तब तक जम्मू कश्मीर में लागु नहीं होगा जब वहां की विधान सभा उसे मंज़ूर न कर ले? इसी का परिणाम है की जम्मू कश्मीर विधान सभा में अफज़ल के बारे में प्रस्ताव पेश होने जा रहा है. और कश्मीरी हिन्दू ६४ साल से तड़प रहे हैं. क्या भारत सरकार आज हमें वापस मुज़फराबाद के अपने मूल घरों में बसाने की हिम्मत रखती है ?
जय हिंद جیہینڈ ਜੈਹਿੰਦ
http://www.apnykhunja.blogspot.com/;
नेहरु ने सरदार पटेल के साथ अपने मतभेदों और महाराजा हरीसिंह से बदला चुकाने के लिए ३ बड़ी गलतियाँ कीं-
जवाब देंहटाएं१- युद्ध विराम
२- यथा स्थिति अर्थात LINE OF CONTROL
३- संयुक्त राष्ट्र की निगरानी
जवाहरलाल नेहरु की जिद को आज भी राष्ट्र भुगत रहा है.
बिल्कुल सत्य !
From: Facebook
जवाब देंहटाएंDate: Tue, 29 May 2012 08:06:33 -0700
Subject: Akshay Sharma commented on Pardeep Kumar's photo of you
To: Ashok Kumar Khatri
Hi Ashok Kumar,
Akshay Sharma commented on Pardeep Kumar's photo of you.
Akshay wrote: "Khatri ji shekh abdula ne kashmir ka charge nehru ki
marji se liya tha
Maharaj Hari singh aisa nahin chahte the
Or abdulla ne sena ki kaman bhi nehru ke haath se li thi
Or usne kashmir ke sirf us hisse ko bachaya jahan uske samarthak the
Jo ilaake abdulla ko pasand nahin karte the wo asurakshit rahne diye gaye"