मंगलवार, 8 मार्च 2016

महिला दिवस

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महिलाओं को मानित या अपमानित करने में, महिलाएं ही मुख्य होती हैं! पुरुष तो गौण होता है! स्वयं के चार उदहारण पेश हैं: - 
१- अक्तूबर १९८१को, मैं अपनी माताजी व पत्नी के साथ ससुराल गया था! मेरी सालेहारी उम्र में मुझसे छोटी है, रिश्ते में बड़ी है! मैंने हंसी मजाक में, उन्हें- "तू" 
बोल दिया! 
मेरी माता ने सबके सामने मुझे डाँटा-

तुझे शर्म नहीं आती, बड़ी सालेहार को तू बोलते हुए।



२- १९८४ में मैंने पत्नी को थप्पड़ मार दिया! छोटी बहिन शशि बोली- 
पिता जी को बताउंगी, कि भाई ने भाभी को मारा! 
हम दोनों अपना झगड़ा भूलकर उसे मनाने लगे:- 
पिताजी को मत बताना!

३- २००३ में हम दोनों में झगड़ा हो गया, छोटी बेटी स्वाति नें मुझसे कहा: - 
शादी ऐसी ही होती है, तो मैंने शादी नहीं करनी!

४- और अब अँतिम विनिश्चय! हम दोनों में झगड़ा हो जाने पर, जब भी पत्नी से पूछता हूँ:- 
नाराज़ हो क्या? 
हमेशा एक ही जवाब मिलता है:- न!

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