रविवार, 4 नवंबर 2012

YAADEN (61) यादें (६१)

छटी कक्षा के दौरान ही अक्तूबर 1967 में हमारे HEADMASTER दुलाराम जी के ससुराल मन्नीवाली मैं मामी जी के साथ दीवाली की छुट्टियाँ बिताने गया। साथ उनके बच्चे संतोष और राकेश भी थे। रायसिंह नगर से दोपहर एक बजे की रेलगाड़ी से सदुलशहर तक SECOND CLASS के डिब्बे में। (उस ज़माने रेल में I, II, III CLASS होती थी।) वहाँ उनके आढ़तियों की दुकान पर गए; तो उन्होंने मन्निवाली तक JEEP किराये पर पर लेकर दी लगभग दिन छिपने पर हम मन्नीवाली पहुंचे।
  मामीजी के पिताजी का नाम मनीराम यादव था। उनके बड़े भाई का नाम रामस्वरूप और छोटा लालचन्द था। उनकी एक भतीजी का नाम स्नेह था। मैं उन्हें यथा-योग्य नाना-नानीमामा-मामी ही कहता था। लालचंद जी अध्यापक थे। 1982-84 में जब मैं लालगढ़ जाटान था तो वे MIDDLE SCHOOL पन्नीवाली में HEADMASTER थे। उनके  साथ काफी बाद तक मेरे अच्छे सम्बन्ध रहे। रावला में संतोष और राकेश की शादी में उनके परिवार के साथ मुलाकातें हुईं थी। बाद में एक दो पारिवारिक पंचायतो के सिलसिले में गंगानगर व् विजयनगर 35GB, मैं साथ गया था। 
मन्नीवाली मैंने वहां छुट्टियों का खूब लुत्फ़ उठाया। खेतों में उनके साथ कपास चुगते हुए मैं अपनी बेसुरी आवाज़ में जोर-ज़ोंर से गाता था- 
अ ऐमेरे वतन के लोगो; 
ज़रा आँख में भर लो पानी; 
जो शहीद हुए है, उनकी
 ज़रा याद करो क़ुरबानी !

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  
Ashok, Tehsildar  Srivijaynagar  9414094991

रविवार, 28 अक्टूबर 2012

YAADEN (60) यादें (६०)

छटी कक्षा के दरम्यान फरवरी 1968 में मामा मनोहरलाल जी शर्मा की शादी में मैं, उनकी बहिन (सीता मामी), पंडित रघुनाथदास जी और विश्वानाथ के साथ दिल्ली गया। बारात के लिया बाकायदा कपडे धोने का साबुन निमंत्रण के रूप में दिया गया था। उसके बाद ये परंपरा बंद हो गयी। 
 METER-LINE तक बठिंडा VIA हनुमानगढ़ आगे बड़ी गाड़ी। किशन गंज STATION पर उतर कर तांगे पर गए थे- ओमप्रकाश शर्मा; T-223A ईदगाह ROAD, सदर थाना; DELHI-6 आज भी मुझे जबानी याद है; कारण ये कि सारे खतो-ख़िताब मेरे हाथ से ही होते थे। दिल्ली में ये श्रीमती मूर्तिदेवी शर्मा का घर था, जो पंडित पुरुषोत्तमदास जी की बहिन थी; इस नाते मेरे माता-पिता भी उनको बुआ कहते थे; उनके बेटे ओमप्रकाश का विवाह पंडित जगन्नाथ जी की बहिन की बड़ी बेटी (मैना) के साथ (श्री योगराज शर्मा 26 सेवक आश्रम रोड; देहरादून) हुआ था।
  बारात सदर से KING'S WAY CAMP गयी थी, रात को वापस आने लगे तो मुझे अजीब सा लगा। हम लोग अच्छे से घूमे थे; जब हम BIRLA मंदिर में थे; तो लगभग उसी समय जापान के सम्राट का भी दौरा था। 
मैं दिल्ली से र 7/- की एक ATTACHEE और 3/- की कोयले वाली PRESS खरीद कर लाया था। किसी शहर में यह मेरी पहली बड़ी खरीददारी थी।

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  
Ashok, Tehsildar  Srivijaynagar  9414094991

रविवार, 21 अक्टूबर 2012

YAADEN (59) यादें (५९)


25NP की पढाई के दौरान एक खास बात ये रही ; की SCHOOL भले ही कोई CYCLE पर  या पैदल जाते रहे हों; नवरात्रों में शाम को SCHOOL से आने के बाद रात का खाना पोटली में बांधते, और पैदल रायसिंहनगर की राह पकड़ लेते। वहां  तक़रीबन 1 बजे तक श्री राम नाट्य क्लब की रामलीला देखते और रात को खेतों में ककड़ी-मतीरे खाते हुए, 2.30- 3 बजे तक घर पहुंचते, सुबह उठकर फिर स्कूल जाते। पर कभी किसी साथी ने इस नींद या थकावट के कारण नागा नहीं किया था। 1970 में आठवीं पास करने पर यह क्रम अपने आप समाप्त हो गया।

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  
Ashok, Tehsildar  Srivijaynagar  9414094991

रविवार, 14 अक्टूबर 2012

YAADEN (58) यादें (५८)

विद्यालय में झाड़ू-बुहारी; पेड़ों को पानी आदि काम उस समय ख़ुशी-ख़ुशी किये जाते थे। माँ-बाप भी इसे अच्छा मानते थे। मैंने भी एक पेड़ लगाया हुआ था; उसकी देखभाल मैं ही करता था। एक दिन मैं पानी डालने गया; उसमे तो पहले से किसी ने पानी डाला हुआ था। मैंने शिकायत कर दी। गुरूजी ने मुझे समझाया ; तो मैं अनमने मन से चुप हो गया। 
छटी में एक शब्द आया- FOREIGN गुरूजी ने बताया- दूसरा देश; मुझे  समझ में आया- दूर का देश;
आठवीं में गुरूजी ने सवाल पूछा- 
IS PAKISTAN A FOREIGN COUNTRY ?
तेजा सिंह ने जवाब दिया- YES;  PAKISTAN IS A FOREIGN COUNTRY !
मैंने फ़ौरन कहा- NO; PAKISTAN IS NOT A FOREIGN COUNTRY !


जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  
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रविवार, 7 अक्टूबर 2012

Yaaden (57) यादें (५७)

कक्षा 7 के समय पंचायत समिति स्तर पर MIDDLE SCHOOLS की अंतरप्रतियोगिताएं MB MIDDLE SCHOOL  रायसिंह नगर में हुईं थीं। वहां प्रधानाध्यापक भागीरथ चौधरी और सुरेन्द्र कुमार शर्मा PTI थे। हिंदी की वाद-विवाद में मैंने प्रथम स्थान ; तथा अंग्रेजी वार्तालाप में मैंने और साहब राम ने प्रथम स्थान पाया था। हमारा संवाद पाकिस्तान के तानाशाह अयूब खान और मिस्र के राष्ट्रपति नासिर के बीच भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 की युद्ध घटना पर आधारित था। मैं  राष्ट्रपति नासिर की भूमिका में अयूब खान को समझा रहा था : -
 HELLO MISTER AYUB GOOD MORNING
BUT MISTER NASIR MY HEART IS TIL YARNING

 बीच की एक पंक्ति मुझे हलकी सी याद है-
NOT ONLY AMERICA, BUT RUSIA TOO

31PS ; उडसर मुकलावा और भादवावाला के टीमें खेलो में आगे थीं।
उस साल जिला-स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हम मोहनपुरा (श्रीगंगा नगर से 8KM उत्तर-पश्चिम )आये थे। अगले साल हम कीकरवाली (रायसिंह नगर से 12 KM उत्तर-पूर्व )और महियाँ वाली (श्रीगंगा नगर से 12 KM दक्षिण) गए थे, उसमें हिंदी में मैंने जिले में दूसरा स्थान लिया था।
 काशीराम गुरूजी हमारे साथ थे। वापसी में गंगानगर हम तीनों ने महावीर भोजनालय RAILWAY-ROAD में ऊपर की मंजिल में खाना खाया था।  AZAD-CINEMA और गणेश में FILM मेरी भाभी और काजल देखी थी। 
फिल्म KAJAL के बेह्तरीन गाने आज भी दिल-ओ-दिमाग पर जादू करते है-
मेरे भैया; मेरे चंदा; मेरे अनमोल रतन; तेरे बदले मैं ज़माने से कोई चीज़ न लूं

 दिल की गहराई में जाकर मदहोश करने वाली रफ़ी साहब की  आवाज़- 
छू लेने दो नाज़ुक होठों को; कुछ और नहीं, जाम है ये।
कुदरत ने जो हमको बक्शा है; वो सबसे हसीं पैगाम है। 
अच्छों को बुरा साबित करना, दुनिया की पुरानी आदत है। 

. .  .  .   .    .   .     .      .    .   .    माना के बहोत बदनाम हूँ मैं
और सबसे बढ़कर मीनाकुमारी पर फिल्माया बेहतरीन भजन जिसे सुनते-सुनते मैं मूर्छित (HYPNOTIZE ) होने लगता हूँ- 
तोरा मन दर्पण कहलाये; भले-बुरे सारे कर्मों को देखे और दिखाए।
जग से चाहे भाग ले कोई; मन से भाग न पाए। 
मन से कोई बात छुपे न मन के नैन हज़ार। 
मन उजियारा; जग उजियारा;
इस उजलेपन पर, काली मैल न जमने पाए।  

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  
Ashok, Tehsildar  Srivijaynagar  9414094991
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रविवार, 30 सितंबर 2012

YAADEN (56) यादें (५६)

छटी की पढाई शुरू होने पर पिताजी मेरे लिए पीतल का छोटा सा कमण्डल लाये ; माँ उसमे रोटी और पनीर  लपेट कर रखती; मैं उसे cycle के handle पर टांग कर ले जाता; सब लड़के उस डोलू को सराहते थे। शायद पूरे school लड़कों में से उस तरह का बर्तन सिर्फ मेरे पास ही था। अधिकांश लडके कपडे की पोटली में ही खाना लाते थे। 
आधी छुट्टी में नहर के किनारे बैठ कर खाने का स्वाद अविस्मरणीय है। कभी मन करता तो किसी पेड़ की टहनी पर चढ़ कर खाते थे। दूसरी खास चर्चा ये होती थी की; मेरे पास खट्टा-मीठा लस्सी का पनीर होता था,  दूध का फीका-फीका पनीर मुझे पसंद नहीं था।मेरे साथी दोस्त भी यदा-कदा चखते थे। 
 उस वक़्त तक PLASTIC के जूता-चप्पल का चलन नहीं हुआ था। गाँव में जब मेरे लिया नरम सुनहरी गुलाबी रंग के PLASTIC के SANDLE 6/- रुपये कीमत के आये तो; सबने सराहा था:-
रामजी के लडके के सैंडल 6 रुपये के !
रामजी गे छोरे गा सैंडल 6 रिपियाँ गा !
ਰਾਮਜੀ ਦੇ ਮੁੰਡੇ ਦੇ ਸੈਂਡਲ 6 ਰਾਪੈਯਾਂ ਦੇ !
 मैं बड़े चाव से पहनता था। उसके बाद उतने मुलायम और सुन्दर प्लास्टिक के जूते-चप्पल मैंने आज तक नहीं पहने। 


जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  

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रविवार, 23 सितंबर 2012

YAADEN (55) यादें (५५)

उस दौरान के दूसरे साथियों में 25NP के जसवंतसिंह, सुरजीतसिंह, अच्छर सिंह,  33NP के बूटासिंह, दलीपसिंह, अशोकसिंह, सतजंडा के हंसराज, राजाराम, बल्लेवाला के हंसराज, ठंडी के साहब राम, रामकिशन, 57NP ओमप्रकाश;  हमसे आगे वालों में 34NP नरेंद्र सिंह, 55NP सोहन लाल राहड़, पीछे वालों में गुरजंटसिंह, महेंद्रसिंह, श्यामसिंह, मोहनसिंह, जसवीरसिंह, सुल्तानराम, 57NP कृष्णचन्द्र के नाम याद हैं। 25NP के कश्मीरी ब्रह्मण परिवारों को 3 या 4 लड़कियाँ भी हमारे साथ 3 साल पढ़ीं।
ओमप्रकाश मेघवाल 57NP  कुछ साल पहले नानुवाला पंचायत का सरपंच था।  जसवंतसिंह POLICE में था, इसी महीने SEPTEMBER 2012 में रायसिंहनगर में देहांत हो गया। नरेंद्र VOLLY-BALL और कबड्डी का खिलाडी था। उससे भी अक्सर 2-4 साल बाद मुलाकात हो जाती है। रामकिशन मसानीवाला में रहता है; गुरजंटसिंह रायसिंहनगर में अध्यापक है, श्रीराम, गुरमेल, विश्वनाथ, और तेजासिंह का ज़िक्र पहले भी हो चुका है। विश्वनाथ 2002 में गुजर गया। तेजासिंह संधू  श्रीगंगा नगर में ADVOCATE है। गुरमेल सरदारपुरा बीका (खिचियाँ) में रहता है।

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  
Ashok, Tehsildar  Srivijaynagar  9414094991

रविवार, 16 सितंबर 2012

YAADEN (54) यादें (५४)


उस समय 25NP, शामगढ़, और रायसिंहनगर में ही MIDDLE SCHOOL थे। हिंदी में माध्यमिक बोला जाता था; लगभग उसी दरम्यान उनका नामकरण उच्च प्राथमिक हुआ।
 नानुवाला, बल्लेवाला, 45NP 55NP 56NP 57NP 35NP सतजंडा,  34NP, 33NP ठंडी, मोहन नगर, 20NP 22NP वाले 25NP ही पढ़ने जाते थे।
छठी में मेरे अलावा नरेंद्र कुमार बिश्नोई 20NP, प्रेम कुमार मंडा 35NP, कृष्ण कुमार मंडा सतजंडा, प्रह्लाद राय 56NP,  पढ़ाई  में होशियार थे
नरेन्द्र कक्षा का MONITER था। एक दिन वह गणित के सवाल करवा रहा था, मैंने SLATE पर सवाल हल करके उसे दिखाया, तो उसने काटा X दिया। मैंने अपनी टाट-पट्टी पर बैठ कर दोबारा जाँच किया, तो मेरे सवाल सही था। मैंने एकदम से जाकर उसका गला पकड़ लिया। वह रोता हुआ HEADMASTER जी के पास गया; पीछे-पीछे मैं भी चला गया। उस दिन से उसने MONITERY छोड़ दी।    उसके पिता पृथ्वी राज सरपंच थे। उसका बड़ा भाई गजेन्द्र हमसे एक CLASS आगे था। बाद में तीन साल  हम दोनों दोस्त बन कर रहे 
25NP का साथ छूटने के कुछ साल बाद साँप काटने से प्रह्लाद की मौत हो गई, पता चला कि नरेंद्र भी छोटी उम्र में गुज़र गया। प्रेम ENGINEERING  में बीकानेर चला गया था, उससे पाँच-चार साल बाद मुलाकात होती रही है; कृष्ण कुमार महाराष्ट्र में KL BISHNOI के नाम से IPS है। उससे आज तक मुलाकात नहीं हुई। 

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ  
Ashok, Tehsildar  Srivijaynagar  9414094991


रविवार, 9 सितंबर 2012

YAADEN (53) यादें (५३)


रतनाराम जी, सफ़ेद कमीज़-पायजामा पहनते थे, और सरल स्वाभाव के थे। उनकी एक आँख नहीं थी। अजमेर सिंह जी नए लगकर पहली बार आये थे; वे सुरुचिपूर्ण FASHIONABLE थे। पेंट के ऊपर पूरे बटनों वाली गोलाई-CUT की कमीज़ का रिवाज़ था। वे सामान्य-विज्ञान पढ़ाते थे। 7वीं की अर्धवार्षिक परीक्षा में मेरे 69/70 NUMBER आये थे। वे पदमपुर के आस-पास रहने वाले थे; 1990 के आस-पास एक-दो बार उनसे मुलाकात भी हो गई थी।
 पदम कुमार जी शर्मा के ज़िक्र के बिना मेरा विद्यार्थी जीवन अधूरा है। वे गजसिंहपुर से आये थे; फिरोजपुर के रहने वाले थे। TERELENE की काली चमकीली पेंट ऊपर वैसी ही चकाचक सफ़ेद बुश-शर्ट, मुंह पर हल्के चेचक के दाग; सुरुचिपूर्ण कंघी किये बाल, और स्नेहयुक्त हल्की मुस्कान लिए मधुर वाणी। संस्कृत और ENGLISH दोनों भाषाओं पर उनका पूरा अधिकार था। वे अक्सर दुलारामजी के साथ नानुवाला आ जाते थे; इस तरह हमारे घर भी उनका आना हो जाता था। मई 1970 में, मैं 8वीं PASS कर चुका था; पदमकुमार जी नानुवाला दुलाराम जी के घर (मेरे ननिहाल)  लेटे-लेटे ख़बरें सुन रहे थे, मैं उनके पाँव दबा रहा था, जैसे LOTIKA RATNAM ने बोला- "AND THAT  IS END OF THE  NEWS" वे RADIO बंद करते हुए पंजाबी में बोले-
बेटा तेरा राज के खजाने में शीर है। ਬੇਟਾ, ਤੇਰਾ ਰਾਜ ਦੇ ਖ਼ਜ਼ਾਨੇ ਵਿਚ ਸ਼ੀਰ ਹੈ। 
मैंने कहा-
गुरूजी मैंने नौकरी नहीं करनी। ਗੁਰੁਜੀ ਮੈਂ ਨੌਕਰੀ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ।
 वे बोले-
नहीं बेटा मैं तो तुझे बता रहा हूँ। ਨਹੀਂ ਬੇਟਾ, ਮੈਂ ਤਾਂ ਤੌਨੁ ਦਾਸਿਯਾ ਹੈ।
उसके बाद मैं देहरादून चला गया था। उनकी बात सही निकली मैं नौकरियां छोड़ता रहा, और नौकरियां मेरे पीछे-पीछे भागती रहीं। 2008-09 में जब मैं नागौर था, एक दिन BUS पदमपुर पहुँचने पर मैंने देखा, वे सामने खड़े थे; मैं आश्चर्य मिश्रित उत्साह में जल्दी से उतर कर भागा। उनको चरण-स्पर्श किया; वे भी गदगद हो गए; मुश्किल से दो या तीन MINUIT की ये मुलाकात थी। 
 
जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
 Ashok, Tehsildar  Srivijaynagar  9414094991

रविवार, 2 सितंबर 2012

YAADEN (52) यादें (५२)

जुलाई 1967 में SCHOOL खुलने के थोड़े दिन बाद, महेंद्र सिंह जी का तबादला हो गया। जिन लड़कों के पास CYCLE थी, वे उनका सामान पहुँचाने मोहन नगर RAILWAY स्टेशन गये थे। गर्मी की दोपहर और रेतीला रास्ता; घर देर से  पहुंचने के कारण, मेरे माँ-पिताजी चिंतित थे। काशीराम जी गणित पढ़ाते थे; वे काफी सख्त स्वाभाव के थे;  पर जिस दिन उनका तबादला हुआ, विदाई पार्टी में वे भावुक हो गये थे, तब मैंने उनकी कोमलता महसूस की थी। उन्होंने विद्यालय के लिए सहयोग भी दिया था।
सोहन लाल जी हिंदी पढ़ाते थे, उनकी हमारे गाँव में मनीराम गोदारा के साथ रिश्तेदारी भी थी; 33NP में उन्होंने कपास बीज रखी थी। जो लड़के 33NP के रास्ते पैदल जाते थे; उनको कपास चुगाई का काम मिला। दूसरे साथियों ने मुझे कहा; तो मैंने मना कर दिया। छटी की छमाही परीक्षा में मेरे 20/70 अंक आये। मैंने हंगामा खड़ा कर दिया। संयोगवश बाशी चाचा जी (सुभाषचन्द्र शर्मा) सोहनलाल जी के परिचित थे। उनको पता चला, तो उन्होंने मुझे समझा-बुझा कर शांत किया।
जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
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रविवार, 26 अगस्त 2012

YAADEN (51) ​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​यादें (५१)

​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​राजकीय उच्च प्राथमिक  पाठशाला 25 NP में दुलाराम जी यादव प्रधानाध्यापक थे। महेंद्र सिंह जी; सोहनलाल जी; काशीराम जी; अवतार सिंह मान; अजमेरसिंह जी ; हरमेलसिंह जी; रतना राम जी  अध्यापक थे; दुलाराम जी नानुवालामें रहने के इच्छुक थे। मेरे ननिहाल का मकान खाली था; पिताजी ने उनको मकान दे दिया।
 इस नाते मैं उनको मामाजी कहने लगा था;मेरे देहरादून जाने के बाद वे रायसिंह नगर, शामगढ़ फिर रावला गाँव, और बाद में हनुमानगढ़ चले गये थे;  ये सिलसिला लगातार उनकी मौत तक जारी रहा; अभी भी उनके परिवार का हमारे साथ वैसा ही सम्बन्ध है।
 अवतार सिंह जी के पिता चड़त सिंह जी की स्कूल स्थापना और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके एक भाई हरवंत सिंह उस समय संगरिया में HEADMASTER थे; जो बाद में  RTS बन गए थे; अवतार सिंह जी हनुमानगढ़ जंकशन भगत सिंह चौक में मान ELECTRICALS और RAJASTHAN ELECTICS के नाम से दुकान करते हैं। उनका मुझ पर अब भी वैसा ही स्नेह है।     
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जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
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रविवार, 19 अगस्त 2012

YAADEN (50) यादें(५०)

और इस तरह एक साल तक मैं, अलग तरह की दुनिया में रहने के बाद JUNE 1967 में वापस नानुवाला आ गया।  आते वक़्त भी बड़े मामाजी साथ थे; सहारनपुर तक बस, आगे अम्बाला, बठिंडा तक रेल , वहां से हिन्दुमलकोट की TRAIN पकड़ कर अबोहर, वहां से गंगानगर बस और फिर रायसिंहनगर पिताजी को मिलते ही मैं रोने लगा था। 

लौटने के बाद, मेरा और विश्वनाथ का एक साथ 25 NP में छटी कक्षा में दाखिला हुआ था। पिताजी मैं, विश्वनाथ और उसकी माता, जिनको मैं आज भी सीता मामी ही कहता हूँ ; हम चारों नानुवाला कोठी होकर नहर- नहर गए थे।  पिताजी मुझे 20" CYCLE दिलाना चाहते थे मैं न तो 20" और न ही 22" पर राज़ी था;  मैंने 24" की बड़ी साइकिल के लिए ही जिद की। चाचा ओम प्रकाश जी मेरे लिए ATLAS CYCLE 140/- में लेकर आये थे। फिर उसकी गद्दी नीची करके FITTING करवाई।

स्कूल जाते हुए हम हवा भरने के PUMP, PUNCTURE,    SOLUTION , WRENCH, BLADE  आदि ज़रूरत का सामान साथ रखते थे। यदा-कदा पटरी से साइकिल समेत नहर में भी कोई गिर जाता था। पैदल जाने वाले नहर वाले रास्ते के अलावा, नानुवाला से सीधे 33 NP होकर 25 NP के पुल पर पहुँच जाते थे। नानुवाला गाँव RD 4.500 पर है; नानुवाला कोठी  SAMEJA DISRTRIBUTERY की TAIL 68.500 RD पर है; और 25NP का पुल 55 RD पर है। इस तरह गाँव से हमारा SCHOOL 18 बुर्जी यानि 18000 FEET है।

 जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
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रविवार, 12 अगस्त 2012

YAADEN 49 यादें(४९)

उन दिनों भनियावाला डोईवाला के आस-पास बालयोगेश्वर का काफी प्रचार था। जगह-जगह पर नारे लिखे थे- "सतयुग आएगा"; हमारे घर के सामने सड़क से उत्तर को मास्टर भगवान सिंह जी के घर के सामने वाले बरामदे में एक दुबले-पतले भगवाधारी बाबा जी मुंह में लोहे का आर-पार खोखला तिकोन लगाकर प्रचार करते रहते थे। उनकी शक्ल-ओ-सूरत मुझे वैसे ही नज़र आती है। उनका कोई अनुयायी मुझे नहीं लगा था। इन बालयोगेश्वर ने बाद में 14 वर्ष की आयु में, अपने से काफी बड़ी एक AMERICAN धनाढ्या से विवाह कर लिया था। 

 गुरु-पर्व पर जुलुस में, माता के मन्दिर; और ऋषिकेश ROAD BUS -स्टैंड  ऋषिकेश ROAD पर महंत जी के डेरे वाले भंडारे में भी मैं डोईवाला गया था। वैसे बड़ी मौसीजी के पास यदा-कदा चला जाता था। गौरीश्याम और इंद्रजीत के साथ मेरी अच्छी पटती थी। चौक बाज़ार में उस वक़्त जवाहर पुस्तक भंडार मशहूर था, वहां से खरीदना शान समझी जाती थी।

 देहरादून झंडेवाले मेले में भी हम गए थे। रानीपोखरी में दादा गुरदित्तामॉल का hotel था; और jolly-grant में दादा दुर्गादास जी परचून की दुकान करते थे। मैं उनके पास भी गया था।  1966 के लोकसभा चुनाव में हरिद्वार क्षेत्र से CONGRESS के सामने निर्दलीय प्रत्याशी नित्यानंद स्वामी थे; भानियावाला में नहर के पास उत्तर दिशा में महन्तों का जो घर है; वे उनके करीबी रिश्तेदार थे। उनका निशान शेर था।वे विजयी रहे थे। बाद में मैंने सुना कि वे congrass में शामिल हो गए।वे उत्तराखंड के मुख्य-मंत्री भी बने। 
तब तक कांग्रेस का नारा-
भारत वालो  आ नहीं जाना,  किसी के  तोड़े-मोड़े पर
सोच समझ कर; मोहर लगाना; दो बैलों के जोड़े पर।।
जनसंघ का नारा था-
देश का दीपक। प्रदेश का दीपक।।

जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
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रविवार, 5 अगस्त 2012

YAADEN 48 यादें(४८)

भानियावाला में उत्तर से दक्षिण नहर जाती थी; उसमे दक्षिण पश्चिम दिशा में नूनावाला नामक गाँव, का जब जिक्र होता तो मुझे लगता कि सब लोग गलत उच्चारण कर रहे है; नानुवाला बोलना चाहिए। इसी तरह से आगे उत्तर-पूर्व को  भोगपुर था; मुझे लगता की इसका सही नाम भोमपुरा {रायसिंहनगर-अनूपगढ़ मार्ग का एक गाँव} होना चाहिए। 
देहरादून से आने वाली UP ROADWAYS की सभी बसें ऋषिकेश तक तो जाती ही थीं; कुछ आगे नरेन्द्रनगर, पौड़ी, या LENSDOWN  भी जाती थीं। एक रानीपोखरी से ऊपर भोगपुर और एक JOLLY-GRANT से ऊपर उत्तर पूर्व को थानों भी जाती थी। सुबह 9 बजे के लगभग HIMACHAL परिवहन नाहन की बस शिमला से हरिद्वार और शाम को लगभग 5 बजे वापस जाती थी। 
भानियावाला-छिद्दरवाला -हरिद्वार सड़क उस समय नहीं थी। छिद्दरवाला हमारे SCHOOL के आगे से कच्चा रास्ता थ। हरिद्वार के लिए डोईवाला से रेलगाड़ियाँ थीं, या फिर ऋषिकेश होकर ही जाना पड़ता था;  बरसात , में टीन की चादरों के नीचे लगे हुए परनालों  से पीने का पानी भरते थे।  काले रंग की AMBASSADOR TAXI का प्रचलन वहां मैंने पहली बार देखा था।
अक्सर देहरादून की तरफ से मुर्दे लदी गाड़ियाँ भी आती थीं, जिनके परिजन ऋषिकेश जाकर दाह-संस्कार करते थे।
 ये सब कुछ मेरे लिए नया अनुभव था। 
जयहिंद جیہینڈ  ਜੈਹਿੰਦ 
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